चूतिया एक ऐसा शब्द है जो किसी मूढ़ मानुष के प्रति मन मेंउमड़ते-घुमड़ते तमाम उद्गारों को तीन अक्षरों में पिरोने की तिलिस्मी शक्ति रखता है। मगर जैसा कि सृष्टि की हर अद्भुत कायनात के साथ होता है, इसके साथ भी वही हुआ। इसके अर्थ और इसकी उत्पत्ति के दावों को लेकर इतनी बुरी तरह से छेड़छाड़ की गई कि आज कथित सभ्य लोग इसे अश्लील समझने लगे हैं और पब्लिकली इस शब्द का इस्तेमाल करने से भी कतराते हैं मगर अब वक्त आ गया है कि हम वापस इस शब्द को इसकी पुरानी गरिमा और पद पर बिठाएं।

मगर कुछ ज़्यादा काबिल लोगों ने इस शब्द को हेय दृष्टि से देखना शुरू कर दिया, तो दूसरी तरफ कुछ ज्यादा अश्लील टाइप गालीबाज लोगों ने अपनी अश्लील भाषा को सही ठहराने के लिए इस शब्द का सहारा लेना शुरू कर दिया कि जब ये शब्द यूज़ किया जा सकता है तो बाकी शब्दों से क्या आपत्ति? मतलब यह शब्द धोबी के कुत्ते जैसा हो गया, न घर का, न घाट का। हर किसी ने इसका अपनी-अपनी तरह से दोहन किया और इसको आज इस निकृष्ट स्थिति में लाकर छोड़ दिया। 

एक शब्द है, चूतिया। बचपन से ही पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में इसका इस्तेमाल मूर्ख के लिए देखता रहा। घर हो या बाहर, पुरुषों के साथ महिलाएं भी मूर्ख व्यक्ति के लिए बेधड़क इस संबोधन का इस्तेमाल करती रही हैं। लेकिन, हाल के कुछ समय में कुछ अपढ़ विद्वानों ने संधि विच्छेद करते हुए इस शब्द के नए अर्थ खोज लिए और गाली व अश्लील घोषित करने में जुट गए। अब हाल ऐसा है कि किसी चूतिया कह दो, तो दिल्ली पट्टी वाले एफ और सी वर्ड्स के मुरीद ऐसा भड़कते हैं, जैसे यह दुनिया की सबसे अश्लील गाली हो। ऐसे विद्वजनों के लिए करीब 185 वर्षों के दौरान के लिखित साक्ष्य यहां दे रहा हूं। ये शब्दकोश लंदन से लेकर बनारस, कलकत्ता और जयपुर तक, यानी देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से, तमाम शोध, कठिन संकलन और अथक परिश्रम से तैयार किए गए हैं। और, इन्हें तैयार करने वाले अंग्रेजी, उर्दू, हिंदी, दक्खिनी, फारसी, संस्कृत, लैटिन, फ्रेंच, अरबी, बांग्ला आदि भाषाओं के प्रकाण्ड विद्वान हैं। इन सभी शब्दकोशों में न सिर्फ चूतिया शब्द के अर्थ बताए गए हैं, बल्कि इससे बने दूसरे शब्दों का विवरण भी दिया गया है: 

## 1- जॉन शेक्सपियर (A Dictionary, Hindustani and English), 1834, लंदन 

ओरिएंटलिस्ट और हिंदुस्तानी भाषा के प्रोफेसर जॉन शेक्सपियर ने 1834 में हिंदुस्तानी-अंग्रेजी शब्दकोश तैयार किया। दूसरे शब्दकोशों की तुलना में जॉन शेक्सपियर की A Dictionary, Hindustani and English विशिष्ट है, जिसमें संस्कृत संदर्भो के साथ उर्दू और हिंदी शब्दों के अंग्रेजी अर्थ बताए गए हैं। मेरे पास इस शब्दकोश का लंदन से प्रकाशित तीसरा वृहद संस्करण है, जिसके पृष्ठ-362 पर चूतिया और चूतिया-शहीद शब्दों के अर्थ बताए गए हैं चूतिया: A blockhead, dunce चूतिया-शहीद: A cully, a dupe 

dunce- a person who is slow at learning; a stupid person. शब्दकोशों के मुताबिक dunce के synonyms में fool, idiot, stupid, halfwit, moron आदि शब्द शामिल हैं। हिंदी में इन शब्दों के लिए कुंद, मूर्ख, बौड़म, बेवकूफ आदि अर्थ हैं। इसी तरह से blockhead भी मूर्ख व्यक्ति के लिए इस्तेमाल होता रहा है। अब चूतिया-शहीद की बात करते हैं। शब्दकोश में दिए गए A cully का इस्तेमाल 17वीं सदी में आमतौर पर भोले-भाले व्यक्ति, मूर्ख, मित्र 

और संगी-साथी के लिए किया जाता रहा है। जबकि, dupe का उद्गम 17वीं सदी में फ्रेंच से हुआ है, जिसका इस्तेमाल छल का शिकार हुए व्यक्ति, भोले-भाले आदमी के लिए होता रहा है। पुस्तक डॉट ऑर्ग में चूतिया-शहीद का अर्थ इस तरह दिया गया है – पुं० [हिं०+फा] बहुत बड़ा मूर्ख। 

## 2- डब्ल्यू येट्स (A Dictionary, Hindustani and English), 1847, कलकत्ता इसके कुछ वर्षों बाद 1847 में डब्ल्यू येट्स की A Dictionary, Hindustani and English कलकत्ता से प्रकाशित हुई।

डब्ल्यू येट्स ने संस्कृत और दूसरी एशियाई भाषाओं पर काफी काम किया है। इससे पहले 1847 में उनका संस्कृत-अंग्रेजी शब्दकोश भी कलकत्ता से प्रकाशित हो चूका था। हमेशा के लिए भारत से जब वह लौटकर गए, तब प्रेस में संस्कृत-अंग्रेजी शब्दकोश पर काम चल ही रहा था जॉन शेक्सपियर कि तर्ज पर ही डब्ल्यू येट्स ने
भी अपना शब्दकोश तैयार किया, जिसके पृष्ठ-211 के अनुसार :
चूतिया – A blockhead
चूतिया शहीद – A cully, a dupe

##3 –

हिंदी शब्दसागर 1907-1927, बनारस

हिंदी शब्दसागर जितनी प्रतिष्ठा शायद ही किसी दूसरे हिंदी शब्दकोश की हो। मेरे पास मौजूद (1907 से 1927 के मध्य 11 शब्दसागर के तीसरे खंड में चूतिया शब्द के साथ ही चूतियाखाता, चूतियाचक्कर, चूतियापंथी और चूतियाश में भी हर जगह इसका अर्थ नासमझ, मूर्ख, गावदी ही बताया गया है। गावदी के अबोध, नासमझ, बेवकूफ, कूढ़मगज, जड़ आदि अर्थ बताये गए हैं। कहीं भी इसके अश्लील या गाली होने का कोई संदर्भ तक नहीं है।

नागरी प्रचारणी सभा की तरफ से 1907 से 19027 के मध्य, 20 वर्षों के अथक परिश्रम से हिंदी शब्दसागर का प्रकाशन किया गया
नागरी प्रचारणी सभा ने सबसे पहले 18वीं सदी के अंत में हिंदी शब्दकोश तैयार करने की दिशा में प्रयास शुरू किए। सुधाकर द्विवेदी , बाबू गोविन्द दास ,रेवरेंड ई ग्रीव्स ने इन कोशिशों को अमलीजामा पहनाया। सभा ने 1893 में दरभंगा नरेश से आर्थिक सहायता प्राप्त की और 1907 में इसके लिए समिति का गठन शुरू हुआ।संपादन समिति में बाबू श्याम सुंदर दास ने मूल संपादक की जिम्मेदारी उठाई, तो बालकृष्ण भट्ट, रामचंद्र शुक्ल, बाबू जगमोहन वर्मा ,रामचंद्र वर्मा , अमीर सिंह और भगवानदीन जैसे भाषाविदों ने मूल सहायक संपादक के तौर पर इसमें योगदान दिया। इसकी संपादक मंडली में सम्पूर्णानन्द,मगलदेव शास्त्री, कृष्णदेव प्रसाद गौड़, हरवंशलाल शर्मा, शिवप्रसाद मिश्र, गोपाल शर्मा, भोलाशंकर व्यास, करुणापति त्रिपाठी, कमलापति त्रिपाठी , धीरेंद्र वर्मा, रामघन शर्मा, शिवनंदन लाल दर, सुधाकर पांडेय, त्रिलोचन शास्त्री, विश्वनाथ त्रिपाठी भी शामिल रहे

हिंदी शब्दकोश तैयार करने के लिए शब्दसागर की रचना अपने आप में अनूठी व खर्चीली परियोजना थी, जिसमें उस समय के प्रकांड हिंदी विद्वानों ने संकलन व संपादन किया। देश में हिंदुस्तानी जुबान वाले शब्दों को जुटाने का अभियान चलाया गया। कश्मीर, ग्वालियर , अलवर इंदौर ,भावनगर बीकानेर आदि के राजाओं और तत्कालीन सरकारों ने बड़ी राशि दान की। बाद के वर्षों में भारत सरकार ने भी आर्थिक सहयोग प्रदान किया । इस परियोजना के दौरान कई तरह की बाधाएं भी आईं, चोरी व आर्थिक संकटों का भी सामना करना पड़ा

## 4- त्रिभाषा (हिंदी-बांग्ला-अंग्रेजी) शब्दकोश, 1927, कलकत्ता 1927 में कलकत्ता से प्रकाशित बिभू भूषण दास गुप्ता के त्रिभाषा (हिंदी-बांग्ला-अंग्रेजी) शब्दकोश में भी बांग्ला व अंग्रेजी में मूर्ख के संदर्भ में ही चूतिया शब्द का उल्लेख किया गया है। पृष्ठ संख्या 328 पर चूतिया का अर्थ दिया है blockhead 

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## 5- यूनिक त्रिभाषा (हिंदी-संस्कृत-अंग्रेजी) कोश, 1990, जयपुर 

जयपुर से 1990 में यूनिक त्रिभाषा (हिंदी-संस्कृत-अंग्रेजी) कोश प्रकाशित हुआ। काशी हिंदी विश्वविद्यालय, बनारस के साहित्य विभागाध्यक्ष डॉ. शिवदत्त शर्मा चतुर्वेदी और जयपुर के पारीक महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष आचार्य उमेश शास्त्री के इस कोश में भी हिंदी के चूतिया शब्द के लिए संस्कृत और अंग्रेजी अर्थ दिए गए हैं: पृष्ठ संख्या 126 : चूतिया – जड़:, मूढ़: – A block-head, fool 

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अब एक तस्वीर सहित थोड़ी सी जानकारी मेरी तरफ़ से भी जोड़ रहा हूँ। ऊपर तो हुई पुराने शब्दकोशों की बात लेकिन कहते हैं कि जो जन में प्रचलित हो गया वही सही मान लिया जाता है। इसका उदाहण वे शब्दकोश हैं जो कुछ साल पहले ही लिखे गए हैं। उदारहण के तौर पर मात्र 6-7 साल पहले महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा का तैयार किया गया ‘वर्धा हिंदी शब्दकोश’ लीजिए। इसके ऑनलाइन संस्करण में चूतिया का सही अर्थ बाद में लिखा है मगर उसके पहले अर्थ के नाम पर जन में प्रचलित भावना लिखी है। देखिए छठा चित्र। 

यहां लिखा है: 

चूतिया [वि.] 1. एक प्रकार की गाली जो समाज में अशिष्ट व अश्लील समझी जाती है 2. {ला-अ.} मूर्ख; बुद्धू; बेवकूफ़। 

चूतियापंथी [सं-स्त्री.] बेवकूफ़ी; मूर्खता; बुधूपन। 

हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस शब्द के ऊपर जो दो शब्द लिखे हैं उनमें से एक शब्द नितंब के लिए है और दूसरा योनि के लिए। ज़्यादातर लोग यही मानते हैं कि चूतिया शब्द की उत्पत्ति योनि वाले शब्द से ही हुई है। अरे भाई, उसी एक शब्द से क्यों हुई है? है तो नितंब वाला दूसरा शब्द भी उसी से मिलता-जुलता, फिर उससे क्यों नहीं हुई है? क्योंकि सिर्फ और सिर्फ़ स्त्रियों के जननांगों से शब्दों को जोड़ने का 

जो आनंद है, वो अन्य कहीं नहीं मिलेगा। यह आनंद मानव की छिपी हुई कुंठा का भी प्रतिबिंब है। 

फिर भी, वर्धा शब्दकोश में इन दोनों शब्दों के ठीक बाद लिखे होने के बावजूद चूतिया शब्द के लिए यह नहीं लिखा है कि इस शब्द की 

उत्पत्ति योनि वाले शब्द से हुई है। लिहाज़ हो, शर्म हो या जो भी, कम से कम इतनी गनीमत रखी है इन्होंने। कल को शायद ये भी न हो। और एक बात, अगर (यह सिर्फ एक कल्पना है, इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है)… अगर योनि से इस शब्द की उत्पत्ति हुई भी होती तो फिर मानव का तो पूरा अस्तित्व ही अपने-आप में गाली है क्योंकि उसकी उत्पत्ति तो उसी योनि से होती है। आपको अपनी मानव योनि पर गर्व है तो इस शब्द पर तो आपको और गर्व होना चाहिए। जिस अंग से आप निकले हैं, उस अंग से बने एक शब्द के लिए ऐसे भाव! छी…छी! मगर, दरअसल यह शब्द गर्व करने के लिए बना ही नहीं है। न ही यह शब्द अश्लील अर्थों के लिए बना था, यह तो बेचारा निरपराध और मासूम सा शब्द मूर्खों के लिए प्रयोग होता रहा है, और अब भी हो रहा है मगर अब इसको अश्लील अर्थों में देखा जाने लगा है जबकि इसका योनि से कोई संबंध नहीं है। तो इसका कबाड़ा भी मूर्खों ने ही किया है। यह सृष्टि का संभवत: एकलौता ऐसा शब्द होगा जिसके अर्थ की प्रवृत्ति वाले चूतियानंदन मानवों ने इस शब्द का अनर्थ कर दिया है।

यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब यह शब्द जनमानस से पूरी तरह अपना असल अर्थ खो देगा और बिगड़े हुए अर्थ को लेकर अपना पूरा जीवन काटने को मजबूर होगा। किसी शब्द से उसका असल अर्थ छीन लेना उसकी आत्मा छीन लेने जैसा है। कोशिश करिए कि इस पाप के भागी मत बनिए। हम लोग वैसे ही आम बोलचाल के बहुतेरे शब्दों का कबाड़ा कर चुके हैं और उनको अश्लील अर्थों के संदर्भ में प्रयोग करने लगे हैं। ये अश्लील संदर्भ उन शब्दों के असल संदर्भ पर हावी होने लगे हैं। कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कल को किसी शब्दकोश में *बजाना* शब्द के अर्थ में भी यही लाइन लिखी होगी- एक प्रकार की क्रिया जो समाज में अशिष्ट व अश्लील समझी जाती है। तब कोई और बता रहा होगा कि भाई इस शब्द का वो मतलब नहीं है। इसका संबंध वाद्ययंत्र अर्थात बाजे से है।

जिस तरह चूतिया शब्द का संबंध संस्कृत के शब्द च्युत से है। यह च्युत का अपभ्रंश (मतलब भ्रष्ट या बिगड़ा हुआ रूप) है। दिलचस्प बात यह है कि अपभ्रंश का जो अर्थ है, कुछ-कुछ वही च्युत का भी अर्थ है- गिर जाना, भ्रष्ट हो जाना, नष्ट हो जाना वगैरह। इसी से बने शब्द हैं- कर्तव्यच्युत, पदच्युत आदि। अत: जो व्यक्ति बुद्धि के समान्य स्तर से कमतर स्तर वाली हरकतें करे, अर्थात जिसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाए, उसे चूतिया कहते हैं।

तो चूतियों वाली हरकतें न करें और इस शब्द को अश्लील दृष्टि से न देखें।

इति श्री चूतिया कथा संपन्न! .

मुकेश पाण्डेय

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